पाकिस्तान ने कश्मीर पर फिर मांगी मध्यस्थता, भारत का रुख साफ – कोई हस्तक्षेप स्वीकार नहीं  

इस्लामाबाद। पाकिस्तान ने एक बार फिर कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाने की कोशिश की है। इस बार पाकिस्तान ने कहा है कि वह कश्मीर मुद्दे पर अमेरिका या किसी भी तटस्थ देश की मध्यस्थता स्वीकार करने को तैयार है।

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने अपने हालिया बयान में कहा कि “भारत और पाकिस्तान के बीच सभी लंबित मुद्दों, खासतौर पर जम्मू-कश्मीर, को सुलझाने के लिए हम किसी भी तटस्थ देश की मध्यस्थता को स्वागत योग्य मानते हैं।”

भारत का रुख स्पष्ट – ‘कश्मीर भारत का अभिन्न अंग’

भारत ने हमेशा यह स्पष्ट किया है कि जम्मू-कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है और इस पर किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता का कोई स्थान नहीं है। भारत ने पहले भी अमेरिका, संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक मंचों पर यह दोहराया है कि “बातचीत केवल द्विपक्षीय होगी और पाकिस्तान को पहले आतंकवाद पर लगाम लगानी होगी।”

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान को नहीं मिल रहा समर्थन

पाकिस्तान भले ही समय-समय पर कश्मीर का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहा हो, लेकिन उसे किसी भी बड़े वैश्विक देश का समर्थन नहीं मिला।

अमेरिका और अन्य देशों ने भी कई बार दोहराया है कि वे भारत और पाकिस्तान को आपसी बातचीत के जरिए मुद्दे सुलझाने की सलाह देते हैं, लेकिन वे मध्यस्थता के पक्षधर नहीं हैं।

विश्लेषण: कश्मीर पर बयान क्यों दोहराता है पाकिस्तान?

विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान घरेलू अस्थिरता, आर्थिक संकट और अंतरराष्ट्रीय दबावों से ध्यान भटकाने के लिए बार-बार कश्मीर मुद्दा उठाता है। इससे उसके आंतरिक राजनीतिक एजेंडे को बल मिलता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

 निष्कर्ष

कश्मीर पर पाकिस्तान का यह नया बयान कोई नई रणनीति नहीं, बल्कि पुराना राग है जिसे वह बार-बार अलग-अलग मंचों पर दोहराता रहता है। भारत का रुख स्पष्ट, सशक्त और अडिग है — कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा था, है और रहेगा।

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