छत्तीसगढ़ में मंत्रिमंडल विस्तार की सुगबुगाहट, पहली बार मंत्री बने हटाए जाएंगे, लेकिन कौन- कौन.?

रविन्द्र मिश्र
नईदिल्ली। छत्तीसगढ़ में मंत्रिमंडल विस्तार की सुगबुगाहट एक बार फिर से तेज हो गई है। राज्य की सियासत में यह बड़ा फेरबदल तय माना जा रहा है। कल मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय राज्यपाल रमेन डेका से मिलने राजभवन गए थे। उसके बाद से मंत्रीमंडल के विस्तार की चर्चा पूरे प्रदेश में की जा रही है। साय कैबिनेट में 3 नए मंत्री शपथ ले सकते हैं। पहली बार विधायक से मंत्री बने में से कौन हटाया जाएगा कहना बड़ा मुश्किल है। साय के 11 सदस्यीय मंत्रीमंडल में 2 उपमुख्यमंत्री और 3 मंत्री है जो पहली बार है। जिसमें ओपी चौधरी, टंकराम वर्मा एवं लक्ष्मी रजवाड़े है। जिन नामों की चर्चा है, उनमें बिलासपुर से अमर अग्रवाल, दुर्ग से गजेंद्र यादव, कुरूद से विधायक अजय चंद्राकर, रायपुर से राजेश मूणत के अलावा बस्तर से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंहदेव को मंत्रिमंडल मंडल में शामिल करने की चर्चा है।
सायं मंत्रिमंडल में पांच मंत्री जिसमें दो मुख्यमंत्री भी शामिल है। पहली बार विधायक बने मंत्री बन गए मंत्रियों में ओपी चौधरी, टंकराम वर्मा और लक्ष्मी रजवाड़े शामिल है। नए मंत्रियों को लेकर कार्यकर्ताओं में संगठन में काफी असंतोष है। अब इनमें से किसको हटाया जाएगा कहना बड़ा मुश्किल है। इनमें से दयाल दास बघेले को आप हटा नहीं सकते हो क्योंकि वह सतनामी कोटा पूरा करते हैं। राम विचार नेताम वरिष्ठ और दिग्गज आदिवासी नेता है। दो उपमुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा है।
हरियाणा की तर्ज पर होगा साय कैबिनेट का विस्तार
हरियाणा की विधानसभा में भी 90 विधायक हैं। हरियाणा में भाजपा सरकार में मुख्यमंत्री समेत 14 मंत्री हैं। लिहाजा, हरियाणा के फॉर्मूले को छत्तीसगढ़ में भी लागू करते हुए 3 और मंत्री बनाए जा सकते हैं। हालांकि, छत्तीसगढ़ में राज्य बनने के बाद से 13 मंत्री डी बनते आए हैं, जबकि नियम के तहत विधायकों की संख्या के 15 प्रतिशत ही मंत्री बन सकते है। इस नियम के तहत 90 विधायकों में 13.5 मंत्री बन सकते हैं। इसलिए मुख्यमंत्री समेत 14 मंत्री भी हो सकते हैं।
क्षेत्रीय और जातिगत समीकरण के आधार पर होगा मंत्रिमंडल विस्तार
साय कैबिनेट में अभी मुख्यमंत्री समेत 11 मंत्री हैं। सबसे ज्यादा सरगुजा संभाग से मंत्री हैं। रायपुर दुर्ग और बस्तर संभाग से मात्र एक-एक मंत्री हैं। इसलिए रायपुर से राजेश मूणत और अजय चंद्राकर का नाम चर्चा में है। वहीं, बस्तर से केदार कश्यप अकेले मंत्री हैं, ऐसे में बस्तर से प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंहदेव का नाम भी सामने आ रहा है। बिलासपुर से रमन सरकार में मंत्री रहे अमर अग्रवाल का नाम चर्चा में है। इसके अलावा, यादव समाज को प्रतिनिधित्व देने दुर्ग से गजेंद्र यादव के नाम की चर्चा भी तेज है। गौरतलब है कि साय कैबिनेट में मुख्यमंत्री समेत 12 मंत्री थे, लेकिन लोकसभा का चुनाव जीतने के बाद शिक्षामंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उसके बाद से मुख्यमंत्री साय 10 मंत्रियों के साथ काम कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ में मंत्रिमंडल का विस्तार कुछ समय से चर्चा का केंद्र बना हुआ है। पहले लोकसभा और नगरीय निकाय चुनाव की वजह से टल गया। इसके बाद चर्चा थी कि विधानसभा के बजट सत्र से पहले नए मंत्री चुन लिए जाएंगे। लेकिन मंत्री पद के दावेदारों को इसमें भी निराशा हाथ लगी। चर्चा आई कि सुशासन तिहार के बाद मंत्रिमंडल का विस्तर हो सकता है। यही वजह है कि इस बार सीएम के दिल्ली दौरे पर सभी की निगाह टिकी हुई थी।
पहली बार मंत्री बने हटाए जाएंगे
मंत्रिमंडल में बदलाव के तहत दो मौजूदा मंत्रियों को हटाया जाना तय माना जा रहा है, हालांकि उनके नामों का आधिकारिक खुलासा नहीं ही हुआ है। माना जा रहा है कि उनके कामकाज की समीक्षा और क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है।
दावेदारों में दिग्गज नेताओं का होना दिक्कत
संगठन से जुड़े लोगों का कहना है कि मंत्रिमंडल के विस्तार में देरी की वजह यह है कि मंत्री के दो पद के लिए कई दावेदार मैदान में है। इस वजह से भी फैसले लेने में थोड़ा विलब हो रहा है। संगठन का इस बात पर भी जोर है कि जातिगत और क्षेत्रीय समीकरण को ध्यान में रखा जाए ताकि विकास की गति सामान्य रूप से चल सके। वैसे संगठन खेमे में जो चर्चा है कि उसके मुताबिक बस्तर संभाग से एक मंत्री बनाना तय माना जा रहा है। वहीं दूसरी ओर बिलासपुर, रायपुर और दुर्ग संभाग के बीच कशमश चल रही है। क्योंकि रमन सरकार के समय मंत्रिमंडल में शामिल बहुत से मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है और संगठन ने युवा और नए चेहरों को महत्व दिया है।
सुशासन तिहार में कामकाज का आंकलन
बताया जाता है कि मुख्यमंत्री साय ने सुशासन तिहार में सरकारी कामकाज के साथ-साथ मंत्रियों के कामकाज का भी आंकलन किया था। सुशासन तिहार समाप्त होने के साथ ही मुख्यमंत्री लगातार मंत्रियों के विभागों की काम की समीक्षा कर रहे हैं। ऐसे में चर्चा इस बात की भी है कि क्या किसी मंत्री को बदला जा सकता है। हालांकि चुनाव की वजह से मंत्रियों को अपनी उपयोगिता साबित करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाया है। ( साभार दैनिक लोकमाया )
