संसद से बनाए गए कानूनों पर संवैधानिकता की धारणा लागू होती है, अदालतें रोक नहीं लगता सकती: केन्द्र सरकार ने एस सी में प्रस्तुत किया शपथ-पत्र

नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने शुक्रवार को वक्फ (संशोधन) कानून, 2025 को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर दिया। हलफनामे में वक्फ कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज करने का अनुरोध करते हुए कहा कि अदालतें किसी वैधानिक प्रावधान पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोक नहीं लगता सकती, वह वैधता की समीक्षा कर सकती हैं। संसद की तरफ से बनाए गए कानूनों पर संवैधानिकता की धारणा लागू होती है।
इसके साथ ही 1,332 पृष्ठों के प्रारंभिक हलफनामे में केंद्र सरकार ने कानून का बचाव करते हुए कहा कि चौंकाने वाली बात है कि 2013 के बाद वक्फ भूमि में 20 लाख हेक्टेयर से अधिक की बढ़ोतरी हुई। इसके लिए निजी और सरकारी संपत्तियों पर अतिक्रमण किया गया और वक्फ के पहले के प्रावधानों का दुरुपयोग किया गया। सरकार ने कहा है कि संसद ने अपने अधिकार क्षेत्र में काम किया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वक्फ जैसी संस्थाओं का प्रबंधन इस तरह से हो कि उनमें आस्था रखने वालों का भरोसा बना रहे और धार्मिक स्वायत्तता का उल्लंघन न हो। मामले में सुनवाई 5 मई को होगी।
धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर अफवाहें
हलफनामे में कहा गया है कि यह अफवाहें फैलाई जा रही हैं कि नए कानून के तहत धार्मिक स्वतंत्रता के मौलिक अधिकारों को छीन लिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट विधायी क्षमता और मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के आधार पर कानून की समीक्षा कर सकती है। प्रमुख राजनीतिक दलों के सदस्यों वाली संसदीय समिति द्वारा व्यापक और विश्लेषणात्मक अध्ययन के बाद कानून में संशोधन किए गए हैं। इससे किसी के भी धार्मिक अधिकार में हस्तक्षेप नहीं होता।
