संघ का एकमात्र लक्ष्य हिंदू समुदाय की एकता और एकजुटता है: मोहन भागवत

कोलकाता. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि संघ को बेवजह राजनीति से जोड़ा जाता है और बीजेपी के चश्मे से देखा जाता है। यह सच है कि कई भाजपा नेता संघ में हैं, लेकिन संघ व भाजपा को एक समझना गलत है। कई लोग संघ के काम को नहीं समझते। संघ हिंदू समाज की भलाई के बारे में सोचता है, किसी दुश्मनी की भावना से काम नहीं करता। संघ के विकास से कई लोगों के हितों को नुकसान हो सकता है। संघ का एकमात्र लक्ष्य हिंदू समुदाय की एकता और एकजुटता है। भारत को फिर विश्वगुरु बनाने के लिए समाज को तैयार करन संघ का कर्तव्य है।
यहां संघ शताब्दी वर्ष के मौके पर हुए कार्यक्रम भागवत ने कहा कि संघ हिंदुओं के संरक्षण के पक्ष में है पर मुसलमानों क विरोधी नहीं है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को यह समझना चाहिए कि पूजा-पद्धति से वे अलग हैं, लेकिन संस्कृति, राष्ट्र और समाज के नाते एक ही बड़ी इकाई के अंग हैं। बस यह समझने से सब ठीक हो जाएगा।
बांग्लादेश में हालात कठिन, सरकार कुछ करेः
भागवत ने बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि वहां हालात काफी कठिन हैं। अधिकतम सुरक्षा के लिए वहां के हिंदुओं को एकजुट रहना होगा। दुनियाभर के हिंदुओं को अपनी सीमाओं के भीतर रहकर उनकी यथासंभव मदद करनी चाहिए। हिंदुओं के लिए एकमात्र देश भारत है, भारत सरकार को इस पर संज्ञान लेकर कुछ न कुछ करना ही पड़ेगा। हो सकता है कुछ हो भी रहा हो, लेकिन कभी नतीजे निकलते हैं, कभी नहीं।
भारत हिंदू राष्ट्र है, संविधान संशोधन की जरूरत नहीं :
भागवत ने कहा कि भारत एक हिंदू राष्ट्र है। संविधान में संशोधन करके वह शब्द जोड़ने या न जोड़ने से कोई फर्क नहीं पड़ता। बाबरी मस्जिद की बात
राजनीतिक षड़यंत्रः पश्चिम बंगाल में फिर से बाबरी मस्जिद बनाने के प्रयास पर भागवत ने कहा कि अदालत के फैसले के बाद अयोध्या में राम मंदिर बन गया। फिर से बाबरी मस्जिद की बात करना वोटों के लिए राजनीतिक षड़यंत्र है, फिर से झगड़ा पैदा करने से न मुसलमानों का फायदा होगा और न ही हिंदुओं का। यदि हिंदू समाज एकजुट होकर खड़ा हो जाए तो बंगाल में हालात बदलने में देर नहीं लगेगी लेकिन राजनीतिक बदलाव के बारे में सोचना उनका काम नहीं है।
