पांच दशक की शानदार पारी खेल विदा हुए सुभाष धुप्पड़, परलोक गमन के बाद छत्तीसगढ़ कांग्रेस में शोक की लहर….

रायपुर। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुभाष धुप्पड़ की गिनती उन नेताओं में होती हैं, जिन्होंने लगभग पांच दशकों तक सत्ता और सरकार को करीब से देखा था। जमीनी कार्यकर्ता और संघर्षों के दौर का सामना करते हुए सुभाष धुप्पड़ ने सिर्फ कांग्रेस ही नहीं बल्कि कारोबारी जगत में अपनी विशिष्ट पहचान कायम की थी। फर्श से लेकर अर्श के सफर में स्वर्गीय विद्या चरण शुक्ल के करीब रह कर धुप्पड़ ने राजनीति के गुर सीखे थे। इस नेता को अंतिम विदाई देने के लिए लोगों का ताँता लगा रहा। रायपुर में उनके अंतिम संस्कार के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचे। मुंबई में उनके निधन की खबर सुनते ही कांग्रेस में शोक की लहर देखी जा रही हैं। कई वरिष्ठ नेता उनके साथ बिताएं पलों को यादगार पलों के रूप में देख रहे हैं।

सुभाष धुप्पड़ ने समय की रफ़्तार को परखा था, लेकिन कभी भी अपने स्वभाव और व्यवहार में बदलाव नहीं लाया था। कभी सत्ता के करीब, तो कभी सत्ता से दूर रहे सुभाष धुप्पड़ ने जीवन के आखिरी क्षणों में भी अपनों से कभी भी मुंह नहीं मोड़ा था। सत्ता का मद नहीं, व्यवहार में बदलाव नहीं यही उनकी खासियत बताई जाती हैं,उनके साथ बिताएं यादगार पलों को लोग कभी नहीं भुला पायेगें। धुप्पड़ को नम आँखों से विदाई देने वाले उनकी जीवन यात्रा को क्रिकेट के खेल की तर्ज पर खेली गई शानदार पारी बता रहे हैं। उनके मुताबिक खेल प्रेमी सुभाष धुप्पड़ का अचानक जाना बहुत खल रहा हैं, उनका अभिन्न मित्र अब इस दुनिया में नहीं रहा, यकीन नहीं हो रहा हैं।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और रायपुर विकास प्राधिकरण (RDA) के पूर्व अध्यक्ष सुभाष धुप्पड़ का 8 दिसंबर की रात मुंबई में इलाज के दौरान एक निजी अस्पताल में निधन हो गया था। वे पिछले कुछ समय से लगातार बीमार चल रहे थे चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद उनकी स्थिति में सुधार नहीं हो सका। स्वर्गीय सुभाष धुप्पड़ लगभग पांच दशकों से सक्रिय राजनीति में कई पदों पर रहे। कांग्रेस संगठन में उनकी पकड़ बेहद मजबूत मानी जाती थी। वे रायपुर के विकास कार्यों और संगठन के अंदरूनी समन्वय में अहम भूमिका निभाते थे। उन्हें कांग्रेस सरकार के दौरान रायपुर विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था, जहां उन्होंने शहरी विकास से जुड़ी कई योजनाओं पर कार्य किया था।

कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के अनुसार, सुभाष धुप्पड़ ने अपने लंबे राजनीतिक सफर में संगठन के विस्तार, बूथ स्तर पर मजबूती और शहर के विकास से जुड़े कई मुद्दों पर कार्य कर कांग्रेस को वर्ष 2018 में सत्ता तक पहुँचाया था। उन्हें रायपुर की राजनीति का ‘विश्वसनीय और संयमी चेहरा’ माना जाता था। धुप्पड़ के संपर्क में आए कई युवाओं ने बताया कि वे हमेशा ज़मीन से जुड़े रहने और सामाजिक सरोकारों को प्राथमिकता देने की सलाह देते थे। उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए कई कांग्रेसी नेताओं ने रायपुर का रुख किया हैं।
