संघ का शताब्दी वर्ष भारतीयता, हिन्दुत्व की शक्ति और आत्म गौरव का उत्सव है : आलोक कुमार

नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से दशकों से जुड़े और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार का मानना है कि अखंड हिंदू समाज में एकता का भाव और उनके पक्ष में देश में बदला वातावरण संघ अभियान की सफलता है। देश में आत्मगौरव की अनुभूति हुई है। संघ की स्थापना की शताब्दी के अवसर पर ‘पत्रिका’ से बातचीत में कुमार ने कहा कि संघ का शताब्दी वर्ष भारतीयता, हिन्दुत्व की शक्ति और आत्म गौरव का उत्सव है। प्रस्तुत है उनसे बातचीत के प्रमुख अंश..

गुलामी की मानसिकता खत्म करने में भूमिका

संघ शताब्दी वर्ष का यह उत्सव हिंदू समाज की शक्ति व संपन्नता का उत्सव है। हमारी सांस्कृतिक विविधता और उसमें एकता का उत्सव होगा। आलोक कुमार आजादी के बाद औपनिवेशिक गुलामी की मानसिकता खत्म करने में संघ की प्रमुख भूमिका रही है। संघ की शताब्दी पर पूरे वर्ष में हिंदुत्व की इतनी विशाल लहरें देश में उठती रहेंगी और पूरा विश्व समाज यह मान्यता देगा कि यही देश की प्राणशक्ति है।

संघ कभी बंटा नहीं, हर पीढी में बढ़ा

ऐसा और कोई बड़ा संगठन नहीं दिखता जिसमें 100 वर्षों में कोई टूट-फूट नहीं हीं हुई हो। महात्मा गांधी को पिछली शताब्दी का महापुरूष मानता हूं। उन्होंने एक ही जीवन में सात लाख गांवों में आजादी का संदेश पहुंचाया और कार्यकर्ता बना दिया। संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार का वैशिष्ट्य यह है कि उनके जीवन में संघ बहुत बड़ा नहीं था। संघ का आंदोलन हर पीढ़ी में ज्यादा मजबूत और बढ़ता रहा है। संघ में हर तीन साल बाद चुनाव होता है। सहमति से हो जाता है कहीं कंटेस्ट नहीं हुआ। न गुट बनते हैं, न टूटन होती है ना कमजोरी आती है। आज सौ वर्ष होने के बाद तो विश्व सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन है।

हिन्दुत्व और संघ ?

जब 1925 में संघ शुरू हुआ तब पूरा हिंदू समाज कटा-फटा था। मैं हिंदू हूं ऐसा कहने में संकोच होता था। आज वातावरण बदल गया है। करोड़ों हिंदू राम मंदिर, राम सेतु व अन्य राष्ट्रीय कार्यों के लिए इकट्ठा होते हैं। हिंदू होना आनंद और गौरव की बात है। आजादी के शुरुआत के सालों में सेक्यूलर होने का मतलब था मुसलमान – ईसाई की बात करो और हिन्दुत्व की बात को सांप्रदायिकता माना जाता था। आज हिंदुत्व राजनीति के भी केन्द्र में स्थान पाए हुए है। मैं समझता हूं कि यह संघ अभियान की सफलता है।

समरसताः एक मंदिर, एक जलस्रोत, एक श्मशान लक्ष्य

सामाजिक समरसता में संघ का बहुत बड़ा योगदान है। भक्ति आंदोलन से लेकर, महात्मा गांधी, आर्य समाज जैसे आंदोलनों ने भी समरसता के लिए काम किया। संघ और संघ परिवार के संगठनों के काम से हम समरस समाज की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। एक मंदिर, एक पानी का स्रोत, एक श्मशान घाट, सबके हृदयों का एक साथ मिलना इस प्रयत्न में संघ और विश्व हिन्दू परिषद ने भी अपनी भूमिका निभाई है।

मोदी सरकार जारी करेगी संघ पर स्मारक डाक टिकट और सिक्का

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष पर मोदी सरकार स्मारक डाक टिकट व सिक्का जारी करेगी। संघ के स्थापना दिवस, विजयादशमी, की पूर्व संध्या पर बुधवार को आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर पर कार्यक्रम करने की तैयारी है। एक अक्टूबर के कार्यक्रम के समय पर अंतिम निर्णय होना है। कार्यक्रम में संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले प्रमुख रूप से हिस्सा ले सकते हैं।

डॉ. हेडगेवार पर जारी हो चुका टिकटः

संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार पर 1999 में वाजपेयी सरकार ने स्मारक टिकट जारी किया था। इससे पहले 1978 में जनता पार्टी सरकार ने जनसंघ संस्थापक पं. दीनदयाल उपाध्याय पर स्मारक टिकट व 2016 में मोदी सरकार ने 10 रुपए का सिक्का जारी किया था।

साभार: दैनिक पत्रिका बिलासपुर

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