पीएम-सीएम बिल पर कांग्रेस की मुसीबत, इंडी गठबंधन में बिखराव के आसार, जेपीसी पर है मतभेद

नईदिल्ली। सभी को जोड़कर चलने की कोशिश में जुटी कांग्रेस फिर अकेली पड़ती दिख रही है। पीएम-सीएम वाले बिल पर विपक्षी एकता का गुब्बारा फूटने लगा है। पीएम-सीएम को हटाने वाले बिल पर जीपीसी में शामिल होने को लेकर इंडिया ब्लॉक में फूट दिख रही है। इंडी गठबंधन के प्रमुख साथियों ने कांग्रेस को इस बिल के मामले में फंसा दिया है। जेपीसी मामले पर राहुल गांधी अब बीच मझधार फंस चुके हैं। यहां से वह किस ओर जाएंगे, यह आने वाले समय में पता चलेगा।
दरअसल, भ्रष्टाचार यानी आपराधिक मामलों में करीब 30 दिनों तक बिना बेल के जेल में रहने वाले प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को हटाने वाले बिलों को जेपीसी के लिए भेजा गया है। इस बिल पर विचार करने के लिए बनने वाली जेपीसी यानी संयुक्त संसदीय समिति में शामिल होने को लेकर ही विपक्षी गुट यानी इंडिया ब्लॉक मतभेद है।
जब संसद में केंद्रीय मंत्री अमित शाह के द्वारा 130वां संविधान संशोधन विधेयक पेश हुआ तब विपक्षी खेमा एकजुट दिखा था। मगर अब धीरे-धीरे विपक्षी एकता की दीवार ढहने लगी है। अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, उद्धव ठाकरे से लेकर अरविंद केजरीवाल तक सभी ने मिलकर कांग्रेस को फंसा दिया है। सपा, टीएमसी, आप और उद्धव गुट वाली शिवसेना ने जेपीसी से अलग रहने का फैसला किया है। हालांकि, कांग्रेस ने अब तक जेपीसी में शामिल होने के संकेत दिए हैं। इंडिया गठबंधन के सहयोगियों के फैसले ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को बीच मजधार में अकेला छोड़ दिया है। अब कांग्रेस के सामने यह मुसीबत है कि वहां अकेली जेपीसी में जाएगी या फिर अन्य साथियों की तरह अलग रहने का ही फैसला लेगी? जहां ममता बनर्जी की टीएमसी ने भी जेपीसी से अलग होने का फैसला किया है ममता की राह पर आगे चलते हुए अखिलेश की समाजवादी पार्टी ने भी जेपीसी को लेकर किनार कर दिया। वहीं, उद्धव गुट वाली शिवसेना ने भी ममता और अखिलेश की राह अपनाई है। शिवसेना नेता संजय राउत का कहना है कि उद्धव ठाकरे को लगता है कि जेपीसी का कोई मतलब नहीं है। वहीं, अरविंद केजरीवाल की आप सांसद संजय सिंह ने कहा कि पार्टी जेपीसी में शामिल नहीं होगी, क्योंकि ये बिल भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए नहीं, बल्कि विपक्ष के नेताओं को निशाना बनाने के लिए लाया गया है। इस तरह इन चार दलों के फैसले ने कांग्रेस को मुश्किल में डाल दिया है। हालांकि, कांग्रेस ने अभी तक आधिकारिक फैसला नहीं लिया, लेकिन पार्टी सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी जेपीसी में शामिल होने के पक्ष में हैं, ताकि बिल के कमजोर पक्षों को उजागर कर सके। हालांकि, अखिलेश, ममता, केजरीवाल और उद्धव ठाकरे के फैसले के बाद कांग्रेस पर दबाव बढ़ गया है। कांग्रेस असमंजस में है। वह क्या करे और क्या नहीं, अभी इस पर मंथन कर रही है।
