कर्नाटक: वोट चोरी पर राजन्ना का कबूलनामा, खोना पड़ गया मंत्री पद

कांग्रेस सरकार में मतदाता सूची गड़बड़ी पर उठाए सवाल, बोले– “हमें शर्म आनी चाहिए थी”
बेंगलुरु/दिल्ली – कर्नाटक सरकार के पूर्व सहकारिता मंत्री के.एन. राजन्ना को ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर दिए गए विवादित बयान के चलते मंत्री पद से हाथ धोना पड़ा। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के करीबी माने जाने वाले राजन्ना ने यह कहकर सियासी तूफान खड़ा कर दिया कि जब मतदाता सूचियों में गड़बड़ी हो रही थी, तब कांग्रेस ही सत्ता में थी, और पार्टी तब चुप क्यों रही? उनके इस बयान से पार्टी में अंदरूनी कलह सामने आ गई है।

राजन्ना के अनुसार, “मतदाता सूची कब बनी? जब हमारी सरकार थी। उस समय, क्या सबने आंखें बंद कर ली थीं? हमें उस समय बोलना चाहिए था, आज नहीं। ये अनियमितताएं हमारी आंखों के सामने हुईं—हमें शर्म आनी चाहिए।”

राहुल गांधी के अभियान के खिलाफ गई बात

राजन्ना का बयान ऐसे समय आया जब राहुल गांधी ‘वोट चोरी’ के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर अभियान चला रहे हैं। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा और चुनाव आयोग की मिलीभगत से फर्जी मतदाता सूची तैयार की जा रही है। लेकिन राजन्ना के बयान ने पार्टी की ही स्थिति कमजोर कर दी।

सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी ने स्वयं उनके इस्तीफे की मांग की, जिसके बाद सिद्धारमैया ने अनिच्छा के बावजूद उन्हें मंत्रिमंडल से हटाने की सिफारिश की।

राजन्ना ने बताई ‘साज़िश’, अब जाएंगे दिल्ली

पद से हटाए जाने के बाद राजन्ना ने कहा, “मैं इस्तीफा, निष्कासन या हटाया जाना—जो कहें, सबके पीछे एक बड़ी साजिश है। मैं जल्द ही दिल्ली जाकर राहुल गांधी, के.सी. वेणुगोपाल और पार्टी अध्यक्ष से मिलूंगा और सारी गलतफहमियां दूर करूंगा।”

उन्होंने यह भी कहा कि वह राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ अभियान का समर्थन करते हैं, लेकिन जो तथ्य हैं उन्हें छिपाया नहीं जा सकता।

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कांग्रेस में बढ़ा आंतरिक तनाव

राजन्ना की बर्खास्तगी ने एक बार फिर कांग्रेस के अंदर दो गुटों—सिद्धारमैया बनाम डी.के. शिवकुमार—के टकराव को उजागर किया है। डी.के. शिवकुमार खेमे के लिए यह एक जीत मानी जा रही है, क्योंकि राजन्ना सिद्धारमैया के करीबी माने जाते हैं।

भाजपा को मिला सियासी हथियार

राजन्ना के बयान का फायदा भाजपा ने उठाया है। भाजपा नेताओं ने कहा कि कांग्रेस के मंत्री ने खुद ही मान लिया कि मतदाता सूची में गड़बड़ी कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुई थी। भाजपा प्रवक्ताओं ने इसे ‘सच बोलने की सजा’ बताया।

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