सीएसईबी जुटा जर्जर राखड़ बांध को ठीक कराने में, जन स्वास्थ्य को लेकर कानूनी कार्रवाई का डर

जवाबदेही भी तय होगी इस मामले में

कोरबा 27 जून। 500 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता वाली एचटीपीपी विस्तार परियोजना के डिंडोलभाठा छिरहुट स्थित राखड़ बांध का तटबंध पिछली शाम दरकने से समस्या पैदा हो गई। बांध से बड़ी मात्रा में निकली राख और जहरीला पानी आसपास के खेतों सहित रिहायशी इलाकों में पहुंच गया। आनन-फानन में ग्रामीणों को अन्यत्र शिफ्ट किया गया।

बिजली कंपनी के सामने बरसात के सीजन में फ्लाईऐश पौंड का कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त होने से पेश आई। एक दशक से भी ज्यादा समय पहले परियोजना के निर्माण के दौरान राखड़ बांध के लिए छिरहुट डिंडोलभाठा और आसपास के कुछ गांवों की सैकड़ों एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई थी। 500 मेगावाट प्लांट से बिजली उत्पादन के लिए प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कोयला का उपयोग किया जा रहा है। यहां से उत्सर्जित राख का कुछ हिस्सा सीमेंट प्लांट और खाली पड़ी कोयला खदानों के लिए दिया जा रहा है जबकि बड़ी मात्रा बांध में ही सुरक्षित है। बारिश के बाद के सीजन में इसे उडने के लिए मौके पर स्प्रिंकलर लगाए गए हैं और पूरे हिस्से को नमीयुक्त किया गया है। बांध की सुरक्षा के लिए कई तरह की कोशिश करने के दावे सिविल मेंटेनेंस डिविजन सीएसईबी लगातार करता रहा है। उसके इन्हीं दावों की पोलपट्टी बरसात के मौसम में खुल गई। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि जून में 108 एमएम बारिश होने के दावे हवा-हवाई हो गए। बेहद सामान्य बारिश होने पर भी सीएसईबी के राखड़ बांध का तटबंध क्या टूटा, आसपास के इलाके में तबाही आ गई। बताया गया कि अनेक किसानों के खेतों को नुकसान पहुंचा वहीं दूसरे खतरे भी सामने आ गए। रात में ही प्रशासन की टीम यहां पहुंची। आज सुबह संसाधनों के साथ सीएसईबी प्रबंधन के ईडी सहित अन्य अधिकारी यहां पहुंचे। उनकी निगरानी में फौरी तौर पर सुधार कार्य शुरू कराया गया। प्रबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस बात की है कि अगर अगले कुछ घंटों में बारिश हो तो संभावित नुकसान को कैसे रोका जा सके। इसी इरादे से मौके पर मजबूत काम कराया जा रहा है।

सीएसईबी प्रबंधन को इस बात का डर बना हुआ है कि कहीं उपयों की अनदेखी और जन स्वास्थ्य के खतरों को लेकर उस पर कानूनी कार्रवाई न हो जाए। क्योंकि इलाके में नुकसान काफी हुआ है और लोगों की परेशानियां बढ़ी है। इससे पहले इसी तरह की समस्याएं 500 मेगावाट क्षमता के डीएसपीएम परियोजना के गोढ़ी स्थित राखड़ बांध में आ चुकी है। वहां की शिकायतें अंतहीन है।

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