सरकारी खर्च पर अपने परिवार को नाश्ता कराने के लिए प्रधानमंत्री के विरुद्ध पुलिस जाँच प्रारम्भ

नईदिल्ली। क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि किसी देश के प्रधानमंत्री द्वारा सरकारी खर्च पर अपने परिवार को नाश्ता कराने के विरुद्ध पुलिस जाँच-पड़ताल कर सकती है?

भारतीय परिवेश में यह असंभव है लेकिन फिनलैंड में ऐसा हुआ है। मई 2021 में वहाँ की प्रधानमंत्री सना मरीन पर सरकारी आवास में रहने के दौरान सरकारी धन से अपने परिवार के नाश्ते के खर्चे को लेकर तब विवाद खड़ा हो गया था जब वहाँ के एक टैब्लॉयड ने खुलासा किया था कि सना मरीन के आधिकारिक आवास में उनके और उनके परिवार के नाश्ते के लिए सरकारी धन का उपयोग किया गया, जो प्रति माह लगभग 850 यूरो (लगभग 74,000 रुपये) था। यह राशि सामान्य नाश्ते के खर्च के लिए असामान्य रूप से अधिक मानी गई, जिसके कारण देश में विवाद खड़ा हो गया। जनता ने इसका कड़ा विरोध किया। उसने प्रधानमंत्री से इस्तीफे की माँग की और कहा कि पैसे वापस करें, इस्तीफा दें और घर जाएं।

फिनलैंड पुलिस ने सरकारी खर्च पर नाश्ता करने पर प्रधानमंत्री पैंतीस वर्षीया सना मरीन के ख़िलाफ़ 29 मई, 2021 को जाँच शुरू कर दी, क्योंकि यह माना गया कि यह खर्च मंत्रिस्तरीय पारिश्रमिक कानून के खिलाफ था।

सना मरीन ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने इस लाभ की माँग नहीं की थी। उन्हें बताया गया था कि यह सुविधा पूर्व प्रधानमंत्रियों को भी दी जाती थी।

हालांकि, इस मामले में औपचारिक रूप से कोई आपराधिक अभियोग दर्ज नहीं किया गया, यह एक प्रारंभिक जाँच थी। इस विवाद ने फिनलैंड में काफी सुर्खियाँ बटोरीं। बाद में, सना मरीन ने इस खर्च की राशि लगभग 12.40 लाख रुपये वापस किये।

सोचिये, क्या भारतीय पुलिस या जनता ऐसा कर सकती है? ऐसा करना तो दूर ऐसी कल्पना भी नहीं कर सकते।

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