छत्तीसगढ़ में बिजली व्यवस्था में बड़ा सुधार: 1 अगस्त से सभी सरकारी विभागों में अनिवार्य होगा ‘प्री-पेड मीटर’ सिस्टम

रायपुर 13 जुलाई । छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार ने शासकीय खर्चों में मितव्ययिता और पारदर्शिता लाने की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य सरकार के नए आदेश के अनुसार, प्रदेश के सभी सरकारी कार्यालयों, संस्थानों और विभागों में अब बिजली खपत और बिल भुगतान की पुरानी व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया जाएगा। आगामी 1 अगस्त से सभी सरकारी विभागों में ‘प्री-पेड बिजली बिलिंग व्यवस्था’ को अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

इस नई व्यवस्था का प्राथमिक उद्देश्य सरकारी विभागों में होने वाले बिजली के अनावश्यक खर्च को रोकना, वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करना और सालों से लंबित बिजली बिलों के भुगतान की लेत-लतीफी को हमेशा के लिए समाप्त करना है।

मोबाइल रिचार्ज की तरह काम करेगी नई व्यवस्था

सरकार द्वारा लागू की जा रही यह प्री-पेड बिलिंग व्यवस्था ठीक वैसे ही काम करेगी जैसे मोबाइल का प्री-पेड रिचार्ज काम करता है।

  • पहले भुगतान, फिर इस्तेमाल: इस व्यवस्था के तहत सभी विभागों को अपने अनुमानित बजट और आवश्यकता के अनुसार बिजली उपयोग करने से पहले एक निश्चित राशि एडवांस में जमा करानी होगी (रिचार्ज करना होगा)। राशि जमा होने के बाद ही संबंधित कार्यालय की बिजली आपूर्ति सुचारू रूप से चालू रहेगी।
  • अलर्ट और री-रिचार्ज: यदि किसी विभाग का रिचार्ज बैलेंस खत्म होने की स्थिति में पहुंचेगा, तो सिस्टम द्वारा समय रहते इसकी सूचना (अलर्ट) दी जाएगी। विभाग को ब्लैकआउट से बचने के लिए समय सीमा के भीतर दोबारा राशि जमा करनी होगी।
    • सटीक मॉनिटरिंग: इस डिजिटल व्यवस्था से हर विभाग अपनी दैनिक और मासिक बिजली खपत पर सीधे और लगातार नजर रख सकेगा, जिससे वे अपनी जरूरत के अनुसार बिजली खर्च का सटीक बजट और योजना बना सकेंगे।
    करोड़ों रुपये के बकाया बिलों से मिलेगी मुक्तिअक्सर देखा जाता है कि बजट की कमी, प्रशासनिक लेत-लतीफी या लापरवाही के कारण सरकारी विभागों में बिजली बिलों का समय पर भुगतान नहीं हो पाता। इसके चलते बिजली कंपनियों (Discoms) का करोड़ों रुपये का राजस्व विभागों पर बकाया हो जाता है, जिससे पूरी विद्युत वितरण प्रणाली प्रभावित होती है।नई प्री-पेड व्यवस्था लागू होने के बाद ‘बकाया बिल’ जैसी समस्या पूरी तरह खत्म हो जाएगी। इससे जहां एक तरफ बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी और उन्हें बड़ी राहत मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों में बिजली के उपयोग को लेकर जिम्मेदारी की भावना बढ़ेगी।चरणबद्ध तरीके से लागू होगा सिस्टम, तैयारियां तेजराज्य सरकार ने ऊर्जा विभाग के माध्यम से सभी संबंधित विभागों और जिला प्रशासन को इस संबंध में कड़े दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
    • इंस्टॉलेशन प्रक्रिया: सभी सरकारी भवनों, कार्यालयों और संस्थानों में चरणबद्ध तरीके से पुराने मीटरों को हटाकर स्मार्ट प्री-पेड मीटर और संबंधित बिलिंग सॉफ्टवेयर लगाने का काम शुरू कर दिया गया है।समय सीमा: उच्चाधिकारियों ने तकनीकी अमले और डिस्कॉम को सख्त हिदायत दी है कि 1 अगस्त की तय समय सीमा से पहले सभी आवश्यक तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी कर ली जाएं।
    विशेषज्ञों की राय: भविष्य में आम जनता के लिए भी खुलेंगे रास्तेऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि प्री-पेड बिजली व्यवस्था उपभोक्ताओं को अपने खर्च पर बेहतर नियंत्रण रखने की आजादी देती है। देश के कई अन्य राज्यों में इस तरह के प्रयोग पहले ही सफल हो चुके हैं।छत्तीसगढ़ में सरकार ने इसकी शुरुआत स्वयं के विभागों से की है, जो कि एक सकारात्मक संदेश है। जानकारों का कहना है कि सरकारी विभागों में इस व्यवस्था के परिणामों और सफलता की समीक्षा करने के बाद, आने वाले समय में इसे चरणबद्ध तरीके से वाणिज्यिक (Commercial) और घरेलू (Domestic) उपभोक्ताओं के लिए भी विस्तारित करने पर विचार किया जा सकता है।फिलहाल, 1 अगस्त से लागू होने वाले इस क्रांतिकारी नियम को लेकर मंत्रालय से लेकर जिला स्तर के दफ्तरों में हलचल तेज है और सरकार को उम्मीद है कि यह कदम राज्य के बिजली प्रबंधन को अधिक प्रभावी, आधुनिक और पारदर्शी बनाएगा।
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