डीएव्ही पब्लिक स्कूल एसईसीएल कोरबा की बड़ी लापरवाहीः भीषण गर्मी और बिजली गुल के बीच परीक्षा देने को मजबूर हुए मासूम

जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) से जांच की मांग
कोरबा 22 मई। एक ओर जहां पूरा प्रदेश भीषण गर्मी और उमस की चपेट में है, वहीं दूसरी ओर बच्चों के भविष्य को संवारने का दम भरने वाले नामी शिक्षण संस्थान बच्चों की बुनियादी सहूलियतें तक छीन रहे हैं। ऐसा ही एक असंवेदनशील मामला डीएव्ही पब्लिक स्कूल एसईसीएल कोरबा से सामने आया है, जहां स्कूल प्रबंधन की घोर लापरवाही के कारण बोर्ड परीक्षा दे रहे मासूम बच्चे दो घंटे तक गर्मी और उमस में तड़पने को मजबूर रहे।
मिली जानकारी के अनुसार, स्कूल में बच्चों के सेकंड बोर्ड एग्जाम आयोजित किए गए थे। परीक्षा के बेहद महत्वपूर्ण और तनावपूर्ण माहौल के बीच अचानक स्कूल की बत्ती गुल हो गई। लगभग 2 घंटे तक बिजली न होने के कारण परीक्षा कक्ष किसी भट्ठी की तरह तपने लगे। हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े और प्रतिष्ठित स्कूल के पास बिजली कटने की स्थिति में जेनरेटर या वैकल्पिक पंखों/कूलर की कोई व्यवस्था नहीं थी।
परीक्षा देने पहुंचे छात्र-छात्राएं इस भीषण उमस में पसीने से तर-बतर होते रहे। गर्मी और घुटन के कारण कई बच्चों का ध्यान परीक्षा से भटकता रहा। परिजनों का आरोप है कि-
परीक्षा जैसी संवेदनशील घड़ी में बच्चों को ऐसा माहौल देना उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
भारी-भरकम फीस वसूलने वाला स्कूल प्रबंधन बच्चों को एक पंखा तक नसीब नहीं करा पा रहा है।
कड़े नियमों का हवाला देने वाला प्रशासन खुद बुनियादी सुविधाएं देने में पूरी तरह फेल साबित हुआ है। “इतनी गर्मी में जब आम इंसान का घर से निकलना मुश्किल है, वहां हमारे बच्चे बिना पंखे के 2 घंटे तक परीक्षा हॉल में बैठे रहे। स्कूल प्रबंधन को सिर्फ फीस से मतलब है, बच्चों की तकलीफ से नहीं।”
यह मामला अब पूरी तरह से जांच का विषय बन चुका है। जागरूक नागरिकों और पीड़ित अभिभावकों ने जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने की मांग की है। आखिर जब स्कूल प्रबंधन के पास आपातकालीन बिजली बैकअप की व्यवस्था नहीं है, तो वे इतनी कड़कड़ाती धूप और गर्मी में स्कूल का संचालन कैसे कर रहे हैं? बच्चों की इस परेशानी को आखिर कब तक अनदेखा किया जाएगा? अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग इस गंभीर लापरवाही पर डीएव्ही स्कूल प्रबंधन के खिलाफ क्या कड़ी कार्रवाई करता है।
