चुनाव में प्रचंड हार के बाद ममता बेनर्जी का त्रियाहठ और संविधान

कोलकाता. राजहठ, त्रियाहठ और बालहठ से सभी वाकिफ हैँ. पश्चिम बंगाल की कार्यवाहक मुख्यमंत्री ममता बेनर्जी विधानसभा चुनाव हारने के बाद त्रियाहठ पर उतर आई हैँ. उन्होंने अपने पद से इस्तीफा देने से इंकार कर दिया है.

विधि विशेषज्ञ का कहना है कि ममता का ये रुख राज्य में संवैधानिक संकट को जन्म दे सकता है. हालांकि सरकार गठन पर इसका असर नहीं पड़ेगा.

एक वरिष्ठ वकील ने कहा कि अगर वह इस्तीफा देने से मना करती हैं, तो संविधान के तहत राज्यपाल उनकी सरकार को बर्खास्त कर सकते हैं, क्योंकि चुनाव आयोग ने जरूरी अधिसूचना और जनादेश जारी कर दिया है. चुनाव नतीजों को चुनौती देने का उनका अधिकार कोई नहीं छीन सकता, लेकिन जब तक कोई सक्षम अदालत कोई आदेश नहीं दे देती, तब तक उन्हें ECI के जनादेश का पालन करना होगा. 
उन्होंने कहा कि विधानसभा का 5 साल का कार्यकाल खत्म होने पर राज्यपाल विधानसभा को भंग कर सकते हैं.

बंगाल की मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 7 मई 2026 को खत्म हो रहा है. आर एन रवि इस वक्त बंगाल के राज्यपाल हैं. वरिष्ठ वकील का कहना है कि ममता का राज्यपाल से मिलकर इस्तीफा नहीं देने से कुछ नहीं बदलेगा. राज्यपाल सदन और सरकार को बर्खास्त कर सकते हैं, क्योंकि जनादेश समाप्त हो चुका है. 

अगर CM इस्तीफा नहीं देती हैं तो राज्यपाल CM को इस्तीफा देने की सलाह दे सकते हैं. अगर CM इनकार करते हैं तो राज्यपाल CM को बर्खास्त कर सकते हैं. अनुच्छेद 164 के तहत मुख्यमंत्री राज्यपाल की कृपा पर ही सरकार में रह सकते हैं.  राज्यपाल मौजूदा मुख्यमंत्री के इस्तीफे के बगैर भी नई विधानसभा में नई सरकार का नया मुख्यमंत्री नियुक्त कर सकते हैं. 

उन्होंने कहा कि कार्यकाल के बीच मुख्यमंत्री बदलने को लेकर तो संवैधानिक अड़चन है लेकिन विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने पर नई विधानसभा के गठन में कोई अड़चन नहीं है. निर्वाचन आयोग ने जिनको जीत का प्रमाण पत्र दिया है, वही मान्य होगा. 

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