जिला पंचायत कोरबा: तार – तार हो रहा अनुशासन, भंग हो रही है गरिमा और मर्यादा, पूरी कहानी – तस्वीरों की जुबानी हो रही बयां

कोरबा। जिला पंचायत कोरबा का अनुशासन, उसकी गरिमा और मर्यादा कुछ निर्वाचित जन- प्रतिनिधियों और महिला प्रतिनिधि- पतियों के क्रिया- कलापों से तार – तार हो रहा है। इन सभी अशोभनीय गतिविधियों पर अंकुश लगना आवश्यक हो गया है।
जिला पंचायत के निर्वाचित जन प्रतिनिधियों से संबंधित कुछ फोटोग्राफ सामने आए हैं। इन तस्वीरों को देखने से स्पष्ट हो जाता है कि जिला पंचायत कोरबा में कैसी – कैसी अशोभनीय गतिविधियां हो रही हैं। कैसे – कैसे लोग निर्वाचित होकर जिला पंचायत के सदन में पहुंच गए हैं।

यह तस्वीर है प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कोरबा प्रवास की। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय हाल ही में कोरबा जिले के कटघोरा नगर के प्रवास पर आए हुए थे। इस तस्वीर में कोरबा के पूर्व महापौर जागेश लाम्बा मुख्यमंत्री का स्वागत कर रहे हैं। मुख्यमंत्री के ठीक पीछे कटघोरा के भाजपा विधायक प्रेमचंद पटेल खड़े हुए हैं। उनकी दाहिनी दिशा में चैंबर ऑफ़ कॉमर्स कोरबा के अध्यक्ष योगेश जैन नजर आ रहे हैं। मुख्यमंत्री के ठीक बगल में रवि रजक खड़े हुए हैं। रवि रजक का परिचय सिर्फ इतना है कि उनकी पत्नी श्रीमती सुषमा रजक जिला पंचायत कोरबा की सदस्य हैं। रवि रजक ने इस फोटो को सोशल मीडिया में वायरल किया और उसके नीचे कैप्शन लिखा- “छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय कटघोरा विधानसभा के विधायक प्रेमचंद पटेल जिला पंचायत सदस्य सुषमा रवि रजक।”

आपको बता दें कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का बगलगीर रवि रजक कटघोरा थाना क्षेत्र के हुंकरा गांव निवासी ठगी के आरोपी शंकर लाल रजक का पुत्र है। शंकर रजक के द्वारा सात करोड़ रुपयों से अधिक की ठगी के 15 से अधिक अपराध पुलिस में दर्ज रहे हैं। ठगी की अधिकतर घटनाएं एस ई सी एल की सरायपाली बुड़बुड़ कोयला खदान क्षेत्र में जमीन खरीदी के नाम पर की गई थी। जमीन खरीदारों को फर्जी ऋण पुस्तिका सहित अन्य दस्तावेज दिया गया था।ठगी के मामलों में शंकरलाल रजक के साथ उसके पुत्र अजय रजक और रवि रजक भी आरोपी रहे हैं। शंकर रजक द्वारा ठगी के करोड़ों रुपए छट्ठी, विवाह, गम्मत आदि कार्यक्रम में बांट देने का दावा पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद किया गया था। यह पूरा काम शंकर अपनी राजनीति चमकाने के लिए करता था। उन दिनों वह चुनाव लडने की तैयारी कर रहा था। शंकर रजक पर नौकरी लगाने के नाम पर भी अनेक लोगों से ठगी करने का आरोप पूर्व में लगा था। उसके द्वारा शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा करने को लेकर बेदखली की कार्रवाई भी पूर्व में राजस्व विभाग कटघोरा ने की थी।

जिला पंचायत सदस्य श्रीमती सुषमा रजक के पति रवि रजक की एक और तस्वीर सोशल मीडिया में शेयर हुई है। यह तस्वीर 30 अक्टूबर 2025 की है। इस दिन जिला पंचायत कोरबा की सामान्य सभा की बैठक आहूत की गई थी। सभा कक्ष में जिला पंचायत अध्यक्ष डॉक्टर पवन कुमार सिंह अपने लिए निर्धारित स्थान पर बैठे हुए हैं। लेकिन उनके दाएं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के लिए निर्धारित कुर्सी पर रवि रजक बैठे हुए हैं। जबकि बाएं एक अन्य जिला पंचायत सदस्य श्रीमती माया कंवर के पति उपाध्यक्ष के लिए निर्धारित कुर्सी पर नजर आ रहे हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष डॉक्टर पवन कुमार सिंह को भी इसमें कोई आपत्ति नहीं है। जबकि यह उनका दायित्व बनता है कि सामान्य सभा कक्ष में किसी भी गैर सदस्य के साथ उनको बैठने से बचना चाहिए और अगर खाली वक्त में बैठते भी हैं तो कम से कम प्रशासनिक अधिकारी और उपाध्यक्ष के लिए निर्धारित कुर्सी पर किसी भी व्यक्ति को बैठने की अनुमति नहीं देनी चाहिए। यह भी देखना होगा की कोई भी गैर सदस्य अपनी सदस्य पत्नियों के स्थान पर अथवा उनके साथ भी जिला पंचायत की बैठकों में मौजूद नहीं रहे। इस तस्वीर को देखकर कहा जा सकता है कि जिस जिला पंचायत अध्यक्ष के कंधों पर जिला पंचायत में अनुशासन बनाए रखने, उसकी गरिमा और मर्यादा को बनाए रखने की जिम्मेदारी है, वही पदाधिकारी संस्था की मर्यादा को अपने सामने ही तार तार होते देख रहा है।

इसी कड़ी में एक और तस्वीर वायरल है। जिला पंचायत कार्यालय में एक कक्ष समय-समय पर कार्यालय आने वाले जिला पंचायत सदस्यों के बैठने के लिए निर्धारित किया गया है। आये दिन देखने में आता है कि जिला पंचायत के निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों के स्थान पर उनके पति इस कक्ष में अपने कार्यकर्ताओं अथवा परिचितों के साथ बैठे रहते हैं। महिला जनप्रतिनिधियों का बैठकों अथवा विशेष अवसरों पर ही जिला पंचायत आना होता है। कभी आवश्यक होने पर सदस्य पति उन्हें अपने साथ लेकर बीच में भी आते जाते हैं। लेकिन अक्सर महिला सदस्यों के पति अपने चेले चपाटो के साथ जिला पंचायत कार्यालय में मंडराते नजर आते हैं और सदस्यों के लिए निर्धारित कक्ष में मजमा लगाकर घंटों बैठे गपशप करते रहते हैं। इस तस्वीर में ऐसा ही नजारा कैद है। एक महिला सदस्य के पति अपने कुछ चहतों के साथ सदस्यों के लिए निर्धारित कक्षा में बैठकर गपशप कर रहे हैं।

एक और केंद्र और राज्य सरकार महिला सशक्तिकरण के लिए कार्य कर रहे हैं। शासन प्रशासन सहित सभी क्षेत्रों में उनकी सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए प्रयासरत हैं तो दूसरी ओर ऐसे लोग भी हैं जो अभी भी उन्हें अपनी चल अचल संपत्ति की तरह इस्तेमाल करने में गुरेज नहीं करते। शासन की मंशा के खिलाफ जाकर उन्हें स्वतंत्र रूप से कार्य करने का अवसर देने के लिए तैयार नहीं है। निर्वाचन में आरक्षण का लाभ दो महिलाओं को मिल रहा है लेकिन वह अभी भी पुरुष प्रधान सोच के अभिशाप से मुक्त नहीं हो पा रही है। निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों का तो अपमान और तिरस्कार हो ही रहा है, साथ ही संवैधानिक संस्थाओं का अनुशासन भी भंग हो रहा है और उनकी मर्यादा और गरिमा भी तार तार होकर बिखर रही है।
