छत्तीसगढ़ के बेटे की अंतरिक्ष में उड़ान: राजशेखर पैरी बनेंगे भारत के नए स्पेस हीरो, टाइटन्स स्पेस इंडस्ट्रीज में हुआ चयन

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से निकले एक और सितारे ने अंतरराष्ट्रीय फलक पर भारत का परचम लहराया है। भारतीय मूल के एयरोस्पेस और मैकेनिकल इंजीनियर राजशेखर पैरी को अमेरिकी कंपनी टाइटन्स स्पेस इंडस्ट्रीज ने अपने पहले ऐतिहासिक अंतरिक्ष मिशन के लिए बतौर अंतरिक्ष यात्री (Astronaut) चुना है। इस चयन के साथ ही वे निजी स्पेस इंडस्ट्री के उस ऐतिहासिक अध्याय का हिस्सा बन गए हैं, जो पृथ्वी की सीमाओं से आगे की उड़ान का सपना साकार कर रहा है।
छत्तीसगढ़ का बेटा बना स्पेस हीरो
राजशेखर पैरी का जन्म छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में हुआ। उन्होंने पेंड्रा रोड स्थित ऑक्सफोर्ड पब्लिक स्कूल से 5वीं से 10वीं तक की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने 11वीं-12वीं हैदराबाद में पूरी की और फिर मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक किया। उनका झुकाव प्रारंभ से ही विज्ञान और प्रौद्योगिकी की ओर था। इंजीनियरिंग के दौरान उन्होंने भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (रक्षा मंत्रालय) में भी काम किया, जिससे उन्हें डिफेंस और स्पेस टेक्नोलॉजी का व्यावहारिक अनुभव मिला। बाद में वे यूके चले गए, जहां उन्होंने एयरोस्पेस प्रणोदन (Aerospace Propulsion) में मास्टर्स किया और फिलहाल ऑर्बिटालॉकर नामक कंपनी में प्रोजेक्ट मैनेजर-इंजीनियरिंग के पद पर कार्यरत हैं।
टाइटन्स स्पेस इंडस्ट्रीज: मिशन भविष्य की ओर
टाइटन्स स्पेस इंडस्ट्रीज एक अग्रणी निजी कंपनी है जो मानव उपस्थिति को पृथ्वी से आगे ले जाने के मिशन पर काम कर रही है। इसका फोकस वैज्ञानिक अनुसंधान, अंतरिक्ष तकनीक और भविष्य की पीढ़ियों के लिए नई संभावनाओं को तैयार करने पर है। इसी मिशन के पहले चरण में राजशेखर पैरी का चयन अंतरिक्ष यात्री के रूप में किया गया है।
कैसे हुआ चयन?
राजशेखर का इस मिशन के लिए चयन कोई सामान्य प्रक्रिया नहीं थी। उन्हें Simulated Lunar Mission, Analog Habitats और अन्य रियल टाइम स्पेस ट्रेनिंग प्रोग्राम्स में भाग लेना पड़ा। इन टेस्ट्स में उन्होंने लीडरशिप स्किल्स, तकनीकी ज्ञान और मानसिक मजबूती का बेहतरीन प्रदर्शन किया। उनकी विशेषज्ञता, समर्पण और वैज्ञानिक दृष्टिकोण ने चयनकर्ताओं को प्रभावित किया और उन्हें इस मिशन के लिए सबसे उपयुक्त उम्मीदवार साबित किया।
राजशेखर की प्रतिक्रिया
अपनी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर राजशेखर ने कहा: “यह अवसर सिर्फ मेरा नहीं है। यह छत्तीसगढ़, भारत और यूके जैसे देशों के उन युवाओं का भी है जो अंतरिक्ष की दुनिया में अपना भविष्य देखते हैं। अगर सही दिशा में मेहनत की जाए, तो अंतरिक्ष भी कोई दूर की चीज नहीं रह जाती।”
मिशन की खासियत: Low Earth Orbit से आगे
इस मिशन के तहत राजशेखर निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) से आगे की उड़ान भरेंगे और महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रयोगों में भाग लेंगे। यह मिशन निजी अंतरिक्ष उड़ानों और विज्ञान के बीच एक नई कड़ी साबित होगा और भविष्य के स्पेस एक्सप्लोरेशन के रास्ते खोलेगा।
भारत के लिए गर्व की बात
राजशेखर पैरी की यह सफलता न सिर्फ छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व की बात है। यह दिखाता है कि छोटे शहरों से निकले युवा भी वैश्विक मंच पर चमक सकते हैं। सीमित संसाधनों में बड़ी सोच और कड़ी मेहनत उन्हें अंतरिक्ष की ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है।बिलासपुर से लेकर ब्रह्मांड की ओर उड़ान भरने वाले राजशेखर पैरी की यह कहानी हर युवा के लिए प्रेरणास्त्रोत है। यह केवल एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती वैज्ञानिक ताकत और विश्व मंच पर उभरती उपस्थिति का प्रतीक है।
