केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति से सहकार भारती प्रतिनिधियों की सौजन्य भेंट

सहकारिता और शिक्षा के संगम की ऐतिहासिक पहल

बिलासपुर। सहकारिता के क्षेत्र को नई ऊर्जा और युवा शक्ति से जोड़ने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए सहकार भारती छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधियों ने गुरुघसीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर के कुलपति प्रोफेसर ए. के. चकवाल से शिष्टाचार भेंट की। यह मुलाकात केवल औपचारिक नहीं रही, बल्कि सहकारिता और शिक्षा के मध्य दीर्घकालिक समन्वय की मजबूत नींव रखी गई।

भविष्य की दिशा तय करती एक सौहार्द्रपूर्ण मुलाकात

इस महत्वपूर्ण भेंट में सहकार भारती के प्रदेश अध्यक्ष श्री राधेश्याम चंद्रवंशी, पैक्स प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक श्री घनश्याम तिवारी एवं जीएडी के अनुविभागीय अधिकारी श्री कमलेश देवांगन शामिल हुए। चर्चा का केंद्र बिंदु रहा – “कैसे सहकारिता को शैक्षणिक पाठ्यक्रम, शोध और युवाओं के जीवन से प्रत्यक्ष रूप से जोड़ा जाए।”

बैठक का वातावरण अत्यंत सौहार्द्रपूर्ण रहा, जिसमें सहकारिता पर आधारित शैक्षणिक कार्यक्रमों, शोध परियोजनाओं, कार्यशालाओं एवं संगोष्ठियों को विश्वविद्यालय स्तर पर क्रियान्वित करने के ठोस प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए।

सहकारिता आधारित पाठ्यक्रम एवं अध्ययन केंद्र की स्थापना का प्रस्ताव

बैठक के दौरान सहकार भारती के प्रतिनिधियों ने विश्वविद्यालय में सहकारिता विषय पर विशेष पाठ्यक्रम, लघु अवधि प्रमाणपत्र कार्यक्रम, तथा एक विशेष अध्ययन केंद्र (Centre for Cooperative Studies and Rural Innovation) की स्थापना का प्रस्ताव रखा। कुलपति प्रो. चकवाल ने इस दिशा में गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया और इसे समाजोपयोगी एवं यथार्थपरक पहल बताया।

सहकारिता और अकादमिक शोध का समन्वय

बैठक में यह भी चर्चा हुई कि सहकारिता पर आधारित पीएचडी शोध प्रबंध, फील्ड स्टडी, एवं इंटरडिसिप्लिनरी कोर्सेस के माध्यम से छात्रों को नीति निर्माण और ग्राम्य विकास से जोड़ा जा सकता है। इससे जहां युवाओं में जागरूकता बढ़ेगी, वहीं सहकारी संस्थाओं को भी प्रशिक्षित मानव संसाधन प्राप्त होगा।

श्री घनश्याम तिवारी ने इस अवसर पर कुलपति महोदय को पद्मश्री डॉ. दामोदर गणेश बापट जी की जीवनी, तथा सहकारिता से संबंधित महत्वपूर्ण ग्रंथों को स्मृति स्वरूप भेंट किया। इन पुस्तकों में सहकारिता आंदोलन के आदर्शों, विचारधारा और व्यावहारिक क्रियान्वयन के मॉडल सम्मिलित हैं।

सहकार भारती का उद्देश्य – युवाओं को बनाना सहकारिता का भागीदार

प्रदेश अध्यक्ष श्री राधेश्याम चंद्रवंशी ने अपने वक्तव्य में कहा कि सहकार भारती का प्रमुख उद्देश्य सहकारिता को केवल एक आर्थिक संरचना नहीं, बल्कि एक राष्ट्र निर्माण का माध्यम बनाना है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों के सहयोग से सहकारिता को एक जनांदोलन का रूप दिया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि यदि युवा वर्ग सहकारिता के सिद्धांतों से जुड़े, तो वे न केवल आत्मनिर्भर बन सकते हैं, बल्कि रोजगार सृजन, सामाजिक उत्तरदायित्व और समूह आधारित निर्णय प्रणाली को भी आत्मसात कर सकते हैं।

प्रशासनिक और जमीनी अनुभवों का समावेश

श्री कमलेश दिवांगन, जो कि वर्तमान में सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) में अनुविभागीय अधिकारी हैं, ने कहा कि सहकारिता आधारित शैक्षणिक कार्यक्रमों को नीति और प्रशासन के साथ समन्वित करना होगा। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र की आवश्यकताओं, संस्थागत ढांचे, और प्रशिक्षण की संभावनाओं पर अपनी बात रखते हुए सुझाव दिया कि पाठ्यक्रमों में माइक्रो लेवल इम्प्लीमेंटेशन को भी शामिल किया जाना चाहिए।

कुलपति चकवाल जी का सहकारिता मॉडल: प्रेरणादायक उदाहरण

कुलपति प्रो. ए.के. चकवाल ने इस भेंट में अपने पांच वर्ष पूर्व प्रारंभ किए गए कोऑपरेटिव फार्मिंग मॉडल की प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि किस प्रकार एक संगठित सहकारी ढांचे के माध्यम से किसानों को संयुक्त खेती, साझा संसाधन, उन्नत तकनीक, प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग, और लॉजिस्टिक्स का लाभ देकर उनकी आय दोगुनी की जा सकती है।

उनका यह प्रयोग सफल रहा तो और उन्होंने बताया कि इससे लागत में कमी, उत्पादकता में वृद्धि और बाजार तक सीधा पहुंच संभव हो सकेगा। कुलपति जी ने यह भी कहा कि यदि इस मॉडल को लागू किया जाए, तो यह एक राष्ट्रीय सहकारी क्रांति का आधार बन सकता है।

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