पर कैपिटा इनकम के साथ पर कैपिटा कैरेक्टर भी जरूरी- राम दत्त चक्रधर

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन में हमारी भूमिका (भारतीय ज्ञान परंपरा के संदर्भ में ) विषय पर व्याख्यान माला का आयोजन

शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास छत्तीसगढ़ प्रांत, डॉ. सी वी रमन विश्वविद्यालय करगी रोड कोटा. बैरिस्टर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र और स्कूल शिक्षा विभाग बिलासपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित

बिलासपुर। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन में हमारी भूमिका (भारतीय ज्ञान परंपरा के संदर्भ में ) विषय पर व्याख्यान माला का आयोजन किया गया . शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास छत्तीसगढ़ प्रांत, डॉ. सी वी रमन विश्वविद्यालय करगी रोड कोटा. बैरिस्टर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र और स्कूल शिक्षा विभाग बिलासपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में अखिल भारतीय सह सरकार्यवाह राष्ट्रीय संघ के राम दत्त चक्रधर मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए एक वैचारिक परिवर्तन की आवश्यकता है। यह वैचारिक परिवर्तन सिर्फ शिक्षा को चुस्त दुरुस्त करने से होगा। इसलिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 लागू की गई है । आज इसके इस जमीनी स्तर पर सफलतापूर्वक उतारने की आवश्यकता है । यह कार्य देश भर के शिक्षण संस्थान कर रहे हैं। इसके लिए धैर्य की आवश्यकता है । उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तीन प्रमुख उद्देश्य हैं। जिसमें प्रथम उद्देश्य यह है कि जो विद्यार्थी राष्ट्रीय शिक्षा नीति से पढ़ाई करके यहां से निकले उसके विचार भारतीय हो। दूसरा महत्वपूर्ण उद्देश्य यह है ,कि जो विद्यार्थी राष्ट्रीय शिक्षा नीति से पढ़ के निकले उसकी बौद्धिकता की दृष्टि भारतीय हो , और तीसरा उद्देश्य यह है कि जो विद्यार्थी राष्ट्रीय शिक्षा नीति से पढ़ाई करके निकले उसे विद्यार्थी का कार्य व्यवहार में भारतीयता होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि जो विद्यार्थी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को पढ़कर समाज में जाएगा, उसके अंदर समय का अनुशासन होगा, वह रोजगार परख शिक्षा प्राप्त करेगा, वह मातृभाषा के प्रति संवेदनशील होगा, और वह विद्यार्थी अनुसंधान की दिशा में कार्य करेगा। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में परंपरागत शिक्षा को विज्ञान से जोड़कर तैयार किया गया है। रामदत्त चक्रधर ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों के साथ उसे क्रियान्वयन कैसे किया जाए इस बारे में भी विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि सिलेबस, पाठ्य सामग्री , आवश्यक उचित संसाधन, इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षकों की कमी को दूर करना भी महत्वपूर्ण है। इसके लिए भी तेजी से काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत2047 सपना पूरा करने के लिए पर कैपिटा इनकम के साथ-साथ पर कैपिटा करेक्टर भी जरूरी है। यह तभी संभव है, जब अच्छे शिक्षक होंगे । उन्होंने कहा कि अध्यापन का कार्य एक तपस्या है । अध्यापक अपनी तपस्या से एक विद्यार्थी का जीवन गढ़ता है, इसलिए हमें अच्छे शिक्षक तैयार करना होगा। जो विद्यार्थी के अंदर की प्रतिभा को समझे और उसे निखार कर बाहर लाये। उन्हें बताया कि शिक्षकों का प्रशिक्षण भी एक महत्वपूर्ण कार्य है। जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति का आधार स्तंभ है। हमें अच्छे शिक्षक बनना होगा। इसके लिए शिक्षकों का प्रशिक्षण आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अच्छा शिक्षक से ही हम राष्ट्र निर्माण करने वाले नागरिक तैयार कर सकते हैं।

इस अवसर पर उपस्थित कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि राजस्व एवं खेल एवं युवा कल्याण मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में समान और समावेशी शिक्षा को केंद्र में रखा गया है।। इससे हम ग्रामीण और शहरी शिक्षा को एक साथ देखते हैं । साथ ही कौशल विकास को भी विशेष महत्व है। यह तभी संभव है जब हम संकल्प सहयोग और समर्पण के साथ काम करेंगे। तब राष्ट्रीय शिक्षा नीति वास्तविक रूप में धरातल पर हम सबके सामने होगी। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे। केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि मानव समाज को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षा ही सबसे सशक्त माध्यम है, शिक्षा की हमारे देश में पुरानी और समृद्ध परंपरा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में मानव समाज को सशक्त रूप से आगे बढ़ाने के लिए समस्त प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने बताया कि पहले गुरुकुल में शिक्षा थी, और अंग्रेजों ने हमारे समृद्ध शिक्षा नीति को खत्म कर दिया था। आज हमारे पास पुनः अवसर है, कि हम अपनी शिक्षा नीति को समृद्ध करें। ज्ञान भाषा, पारंपरिक ज्ञान, संस्कृति पर केंद्रित शिक्षा नीति से से हम भारत को भारत बनाने बनाएंगे ।उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति को आत्मसात करने की आवश्यकता है। इस अवसर पर उपस्थित डॉर सी वी रमन विश्वविद्यालय के कुल सचिव डॉ. अरविंद तिवारी ने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति युग परिवर्तन करने वाली नीति है । इसमें विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, भारत के गौरवशाली इतिहास का अध्ययन, भाषा की शक्ति को रेखांकित कर किया गया है । भारतीय ज्ञान, परंपरा, भारतीय कौशल, भारतीय संस्कृति और भाषा को लेकर तैयार की गई । राष्ट्रीय शिक्षा नीति को क्रियान्वयन की दिशा में हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं । उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने का सबसे बड़ा आधार होगा।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति का सही क्रियान्वयन आगे आने वाली पीढ़ी में भारतीयता चरित्र निर्माण तार्किक शक्ति अनुशासन एवं समृद्ध भारतीय ज्ञान परंपरा तथा समृद्ध विरासत का विकास कर विकसित भारत गढेगी। इस अवसर पर अतिथियों ने डॉक्टर सी सी रमन विश्वविद्यालय द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर केंद्रित मार्गदर्शिका का विमोचन भी किया यह मार्गदर्शिका सभी प्राचार्य एवं प्राध्यापकों को वितरित की गई। कार्यक्रम के संयोजक, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास छत्तीसगढ़ प्रांत के डॉ प्रफुल्ल शर्मा ने कार्यक्रम में आभार प्रकट किया और सभी महाविद्यालय स्कूलों के प्राचार्य से कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति की राष्ट्र निर्माण की नीति है। इस अवसर पर, नारायण नामदेव सह प्रांत प्रचारक, बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला, अटल बिहारी वाजपेई विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य अरुण दिवाकर नाथ बाजपेई, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति कुलपति गिरीश चंदेल, जिला शिक्षा अधिकारी अनिल तिवारी सहित सभी महाविद्यालय के प्राचार्य सभी विद्यालयों के प्राचार्य सहित बड़ी संख्या में शिक्षा जगत के लोग उपस्थित थे।

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